Aaj Ka Shabd Lagi Meerabai Best Poem Hey Ri Mai To Prem Diwani

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- लागी, जिसका अर्थ है- लगन (प्रेम)। प्रस्तुत है मीराबाई की रचना- हे री मैं तो प्रेम दिवानी 
                                                                                                
                                                     
                            

हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय। 
सूली ऊपर सेज हमारी, किस बिध सोना होय। 
गगन मंडल पर सेज पिया की, किस बिध मिलना होय॥ 

घायल की गति घायल जानै, कि जिन लागी होय। 
जौहरी की गति जौहरी जाने, कि जिन लागी होय॥ 

दरद की मारी बन बन डोलूँ वैद मिल्यो नहीं कोय। 
मीरां की प्रभु पीर मिटै जब वैद सांवलया होय॥

भावार्थ:- ऐ सखी, मैं तो प्रेम में दीवानी हो गई हूँ, मेरी तकलीफ कोई नहीं जानता। हमारी सेज सूली पर है, भला नींद कैसे आ सकती है! और मेरे महबूब की सेज आसमान पर है। आख़िर कैसे मुलाक़ात हो। घायल की हालत तो घायल ही जान सकता है, जिसने कभी चोट न खाई हो; जौहरी के जौहर को जौहरी ही पहचान सकता है बशर्ते कि कोई जौहरी हो। दर्द से बेचैन होकर जंगल-जंगल मारी फिर रही हूँ और कोई बैद्य मिलता नहीं मेरे मालिक। मीरा का दर्द तो उस वक़्त मिटेगा जब सलोने-साँवले कृष्ण इसका इलाज करेंगे।

2 hours ago

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